आंटी : बेटा पहली बार घर आए हो , कुछ तो लेना पड़ेगा
संजू : ठीक है अपनी बेटी देदो 😂😂
आंटी : साले !! निकल घर से , दुबारा कदम रखा ना तो टाँगे तोड़ दूँगी।😜 😜 😄 😃 😜

पंद्रह बीस साधू संत हिमालय का पहाड़ चढ़ रहे थे।
एक रिपोर्टर ने यूँ ही पूछ लिया “बाबा आप लोग कहाँ जा रहे हो?”
बाबा: “समाधि लेने”
रिपोर्टर “पर क्यों ?”
बाबा : “जबसे whatsapp आया है बड़े बड़े ज्ञानी पैदा हो गये है…. अब संसार को हमारी जरूरत ही नहीं”😝😛😝😛😝😛😝😛

लड़की: ये टीवी कितने का है? 😊
दुकानदार : 50,000/- रू. 😚
लड़की: इतना महंगा? ऐसा क्या खास है? 😳
दुकानदार : ये लाईट जाने के बाद AUTOMATIC बंद हो जाता है 😉😉
लड़की: ओह पैक कर दो फिर तो 😄 😃 😃 😃

दो समधी ड्रिंक करने बैठे:
लड़के का पिता “कितना पानी डालूँ?”
लड़की का पिता “नो वॉटर!”
लड़के का पिता “क्यों?”
लड़की का पिता “हमारे यहां बेटी के घर का पानी नहीं पीते!”
ये होते हैं संस्कार!!!😝😄 😃 😃 😃

  • एक बार एक ताऊ ने एक ताई छेड़ दी……. ताई ताऊ को गाली देने लग गयी….
    पास से एक लड़का गुज़र रहा था बोला क्या बात होगयी ताउजी।
    ताऊ- कुछ नहीं बेटा,पुराना ट्रांसफार्मर है…….चरड चरड कर रहा है 😂😂😂😁
  • लड़की गिफ्ट की दूकान में – काफी देर गिफ्ट देखने के बाद एक गिफ्ट की तरफ इशारा करते हुए पूछा…ये हँसती हुई चुड़ैल कितने की है ?
    दुकानदार- मैडम जी ये आईना है😃😃😃

ब्बर सिंह का चरित्र चित्रण
1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा
सरल था. पुराने और मैले
कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दां
त और पहाड़ों पर खानाबदोश
जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की
ओर इतना
समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासि
ता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और
विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! ‘जो डर गया, सो मर गया’ जैसे
संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.

२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने
हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने
ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी
काट सकता था.
पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.

3. नृत्य-संगीत का शौकीन: ‘महबूबा ओये महबूबा’ गीत के समय उसके कलाकार
ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्
रदय शुष्क नहीं था.
वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला
के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को
पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्
यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के
अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में
पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के
प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.

4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त
अपने प्रोजेक्ट से नाकाम
होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने
अगाध
समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.

5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स
ऑफ ह्यूमर था. कालिया और
उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसा
या था. ताकि
वो हंसते-हंसते दुनिया को अलवि
दा कह सकें. वह आधुनिक यु का ‘लाफिंग
बुद्धा’ था.

6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर ना
री का अपहरण करने के बाद
उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो
शायद कुछ और
करता.

7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महा
त्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए
भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से
उसे जो
भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर
करता था. सोना,
चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.

8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा
वो छोटे बच्चों को सुलाने का
भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम ले
ती थीं ताकि बच्चे बिना कलह
किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित
कर रखा था. उस
युग में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ ना होने के बावजूद लो
गों को रातों-रात अमीर
बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.

9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता
तो जय और वीरू जैसे
लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां
करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर
के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने
की क्षमता
जागी.

कल अख़बार में एक आर्टिकल पढ़ा

“बीवी को कैसे नियंत्रित रखें”

पूरा आर्टिकल एक सांस में पढ़ लिया – सुबह टहलने जाएं,
ज्यादा हरी सब्जियां खाएं,
क्रोध न करें,
खान पान का विशेष ध्यान रखें,
रेगुलर चेक अप करवाएं, वगैरह वगैरह…

बाद में फिर से हेडिंग ध्यान से पढ़ी, दिमाग ख़राब हो गया, लिखा था

“बीपी को कैसे नियंत्रित रखेँ”

अब आँखें चेक करवानी पड़ेगी…

दीवार पर लिखा था “यहां कुत्ते
सुसु करते हैं!”

संता ने वहां सुसु किया और फिर हंस कर बोला:
‘इसे कहते हैं दिमाग.. सुसु मैंने किया और नाम कुत्ते का आएगा.’

 

ये लो एक और मुसीबत..

श्री मती जी मुंह फुलाये बैठी है
कहती है तीन सौ अस्सी ग्राम सोना और लाकर दो..

सरकार कहती है पूरा आधा किलो सोना मेरे हक का है।

 

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