संता और बंता एक रोज आलस के मारे एक कमरे में लेटे हुए थे।

बंता: यार जरा बाहर जाकर तो देख, बारिश हो रही है क्या?

संता: हाँ, बारिश हो रही है।

बंता: बिना देखे ही तू कैसे कह सकता है?

संता: अभी-अभी जो बिल्ली अंदर आई थी वो भीगी हुई थी, इसका मतलब बारिश हो रही है।

थोड़ी देर बाद बंता फिर बोला, “जरा बत्ती तो बुझा दे यार, मुझे रौशनी में नींद नहीं आती।”

संता: आंखें बंद कर लो अपने-आप अंधेरा हो जायेगा।

बंता झल्लाकर बोला, “कम से कम दरवाजा तो बंद कर ले।”

संता: अब दो काम मैंने कर दिए, एक-आध काम तू खुद भी कर ले।

बंता ज्योतिषी से, “मुझे कैसे पता चलेगा कि मेरा बेटा भविष्य में क्या बनेगा?”

ज्योतिषी: आप उसके टेबल पर सिगरेट, बियर, पैसों की एक गड्डी और किताबें रख दो। उनमें जो वो उठाएगा उससे पता चलेगा।

बंता: ठीक है।

अगले दिन जब बंता का बेटा आया तो उसने टेबल पर पड़ा हुआ सामान देखा और पैसों की गड्डी उठा कर जेब मैं रख ली, सिगरेट पी, बियर छुपा ली, ओर क़िताबें हाथ में लेकर घर से चला गया।

बंता ज्योतिषी के पास गया और बताया कि उस नालायक ने तो सब कुछ ले लिया।

ज्योतिषी: अरे, मुबारक हो! आपका बेटा राजनीतिज्ञ (Politician) बनेगा।

एक बार संता शाम को घर आया, टी. वी. चालू किया और सोफे पर बैठते ही जीतो से बोला, “इससे पहले की शुरू हो जाये जल्दी से मेरे लिए चाय लेकर आओ।”

जीतो को कुछ अजीब लगा पर वो चाय बना कर ले आई।

चाय पीते-पीते संता दोबारा जीतो से बोला, “इससे पहले शुरू हो जाये, मेरे लिए कुछ खाने के लिए भी लेकर आओ।”

जीतो को थोड़ा गुस्सा आया पर उसने संता को कुछ खाने के लिए भी दे दिया और वापस अपने काम में लग गयी।

थोड़ी देर बाद संता दोबारा बोला, “इससे पहले की शुरू हो जाये, यह बर्तन उठाओ यहाँ से।”

जीतो का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया और संता पर चिल्लाते हुए बोली, “मैं तुम्हारी कोई नौकरानी नहीं हूँ, जो मुझ पर इस तरह अपना हुकुम चला रहे हो। जब से आओ कुछ न कुछ हुकुम किये जा रहे हो जैसे यहाँ कोई तुम्हारा गुलाम है।”

संता उठा और गहरी सांस लेते हुए बोला, “लो शुरू हो गया।”

संता बार में गया तो बार टेंडर ने उसे पूछा, “क्या लोगे आज?”

संता: बस एक बियर।

बार टेंडर: क्या हुआ? आज तुम कुछ ठीक नहीं लग रहे, इतने उदास क्यों हो?

संता: मेरा मेरी बीवी से झगड़ा हो गया था, उसने मुझे कहा कि वो एक महीने तक मुझसे बात नहीं करेगी।

बार टेंडर: फिर उसमे क्या दिक्कत है?

संता: आज एक महीना पूरा हो गया।

एक दिन संता ने अपनी भाभी को खूब मारा। उसके चिल्लाने की आवाज सुन कर पड़ोसी देखने आ गए और संता से पूछने लगे कि क्या बात हो गयी, इतना क्यों मार रहे हो अपनी भाभी को?

संता(गुस्से में): भाईसाहब ये हमारी पीठ पीछे छुप -छुप के रोज मेरे सभी दोस्तों से बाते करती है।

पडोसी: तुम्हे कैसे पता लगा?

संता: अरे मैं जब भी अपने किसी दोस्त से पूछता हूँ कि वो फ़ोन पर किस बात कर रहे हैं, वो यही कहता है ‘तुम्हारी भाभी से’।

एक बार संता और बंता, किसी बियर बार में बियर पीने गये। जब वह पीने लगे तो बंता बोला, “लगता है बाहर बारिश हो रही है। तुम ऐसा करो घर जाकर जल्दी से छतरी ले आओ।”

संता गुर्राया: मुझे पता है मेरे जाने पर तुम मेरी सारी बियर पी जाओगे।

बंता ने उसे यकीन दिलाया कि वो उसकी बियर नहीं पियेगा। उसके हिस्से की बियर ज्यों की त्यों रखी रहेगी।

संता यह सुनकर मान गया और छतरी लेने चला गया।

जब रात गहराने लगी पर संता छतरी लेकर नहीं लौटा तो बंता ने सोचा शायद संता घर पर ही रुक गया है और अब नहीं आएगा। यही सोच कर उसने संता का बियर वाला गिलास उठाया ही था कि बार के एक कोने की छोटी सी खिड़की से तेज आवाज आई, “अगर पीओगे तो मैं छतरी लेने नहीं जाऊंगा।”

एक बार एक गाँव में तीर-अंदाज़ी की प्रतियोगिता चल रही रही थी। 3 नकाबपोश आदमी उसमे भाग लेने के लिए आये।

पहले नकाबपोश ने तीर चलाया और तीरा लक्ष्य के ठीक बीचों-बीच जाकर लगा। आदमी ने अपना नक़ाब उतारा और बोला, “मैं रॉबिन हुड हूँ।”

लोगों ने खूब तलिया बजायी और उसका स्वागत किया।

फिर दूसरे नकाबपोश ने तीर चलाया तो तीर लक्ष्य के बीच लगे रॉबिन हुड के तीर को चीरता हुआ चला गया। उसने अपना नक़ाब उतार और बोला, “मैं विलियम टेल हूँ।”

अब तीसरे आदमी ने तीर चलाया तो तीर लक्ष्य से बहुत दूर जाकर गिरा। आदमी ने अपना नक़ाब उतारा तो संता था। सभी लोग उसे घूर-घूर कर देख रहे थे तो संता बोला, “माफ़ करना दोस्तो मैं सीख रहा हूँ।”

एक आदमी ने मोटर साइकिल पर बैठ कर सिनेमा हाल के सामने संता से एक सवाल पूछा।

आदमी: भाईसाहब, मोटर साइकिल का स्टैंड कहाँ है?

संता: भाईसाब, पहले आप अपना नाम बताइये?

आदमी: रमेश।

संता: आपके माता-पिता क्या करते हैं?

आदमी: क्यों? भाई साहब मैं लेट हो जाऊंगा और फिल्म शुरू हो जाएगी।

संता: तो जल्दी बताओ?

आदमी: मेरी माँ एक डॉक्टर हैं और मेरे पिता जी इंजीनियर हैं। अब बता दीजिये?

संता: आपके नाम कोई जमीन जायजाद है?

आदमी: हाँ, गांव में एक खेत मेरे नाम है? प्लीज़ भाई साहब अब बता दीजिये स्टैंड कहाँ है?

संता: आखिरी सवाल, तुम पढ़े लिखे हो?

आदमी: जी हाँ, मैं MBA कर रहा हूँ। अब बताइये जल्दी से।

संता: भाई साहब, देखिये आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि इतनी अच्छी है, आपके माता पिता दोनों उच्च शिक्षित हैं, आप खुद भी इतने पढ़े लिखे हैं पर मुझे अफ़सोस है कि आप इतनी सी बात नहीं जानते कि मोटर साइकिल का स्टैंड उसके नीचे लगा होता है। एक बड़ा और एक साइड वाला।

एक दिन बंता जब संता से मिलने गया तो उसने देखा कि संता बहुत परेशान है। उसने संता से उसकी परेशानी का कारण पूछा।

बंता: क्या हुआ बड़ा परेशान लग रहा है?

संता: हाँ यार थोड़ी तबियत ख़राब है।

बंता: क्या हो गया? डॉक्टर को दिखाया तुमने?

संता: थोड़ा दिल में दर्द हो रहा है। डॉक्टर मेहता को दिखाने जा रहा हूँ।

बंता: पर वो तो बच्चों के डॉक्टर हैं।

संता: हाँ पर इसका इलाज़ वही कर सकते हैं।

बंता: तू पागल हो गया है क्या? दिल का इलाज़ दिल का डॉक्टर करेगा। बच्चो का डॉक्टर नहीं।

संता: यार तुम नहीं समझेगा डॉक्टर मेहता ही मेरा इलाज़ कर सकेंगे।

बंता: वो कैसे?

संता: तुमने सुना नहीं ‘दिल तो बच्चा है जी’।

एक दिन संता ऑफिस जाने के लिए जब बस में चढ़ा तो कंडक्टर ने हँसते हुए पूछा, “कल रात आप ठीक-ठाक घर पहुँच गए थे? कहीं गिरे तो नहीं या रास्ता तो नहीं भूले थे घर का?”

संता (गुस्से से): क्यों, कल रात को मुझे क्या हुआ था?

कंडक्टर: कल रात आप नशे में टुन्न थे।

संता: तुम कैसे कह सकते हो कि कल रात मैं नशे में था। हमने तो आपस में कोई बात भी नहीं की थी।

कंडक्टर: जी, वो ऐसा है कि कल रात जब आप बस में बैठे हुए थे तब एक मैडम बस में चढ़ी थी और आपने उन्हें उठकर अपनी सीट पर बैठने के लिए कहा था।

संता (हैरानी से): तो क्या किसी महिला को सीट देना कोई गुनाह है?

कंडक्टर (हँसते हुए): गुनाह तो नहीं है पर जब आप ने उनको सीट के लिए पूछा उस समय बस तो पहले से ही खाली थी।

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