संता – जो मेरी इच्छा पूरी करेगा उसको 1 लाख रूपये दूंगा ।

बंता – बोल क्या इच्छा है तेरी ?

संता – मुझे 2 लाख रुपये चाहिए ।

सांता – लो लाईट चली गयी ।

बंता – लाईट चली गयी तो क्या हुआ, बहुत गर्मी लग रही है,
पंखा तो चालू कर ।

सांता – लो कर दी न तूने महामुर्खो वाली बात…

अरे पगले…

अगर पंखा चालू कर दिया तो

ये मोमबत्ती बुझ नहीं जायेगी !!!

बैंक मैनेजर: – ये क्या अजीब सा हस्ताक्षर है…??
“@/e”
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संता: – ये हस्ताक्षर मेरी दादी के हैं…!!!
बैंक मैनेजर: – ऐसा अजीब सा हस्ताक्षर…???
क्या नाम है उनका…???
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संता: – जलेबी बाई…!!!

संता अपने बेटे पप्पू की वजह से बहुत परेशान था।

इसी का सलाह-मश्वरा करने वो अपने दोस्त बंता के पास पहुंचा।

संता: यार, मैं अपने बेटे पप्पू को लेकर बहुत चिंतित हूँ।

बंता: क्यों क्या हुआ? उसने फिर कोई बदमाशी कर दी क्या?

संता: नहीं यार, वो बात नहीं है।

बंता: तो फिर क्या बात है?

संता: बस आज-कल जब भी वो सुबह उठता है तो बहुत थका-थका और सुस्त महसूस करता है। समझ नहीं आ रहा कि ऐसा क्यों होता है?

बंता भी अपने आप को होशियार साबित करने की कोशिश में लग गया।

बंता: तुम उसे सोने से पहले दूध पिलाते हो क्या?

संता: हाँ, पिलाता हूँ।

बंता: बस यही कारण है उसकी इस हालत का।

संता: मैं कुछ समझा नहीं। दूध के कारण ऐसा कैसे हो सकता है?

बंता: जब तुम उसे रात को दूध पिलाते हो तो रात को सोते वक़्त जब वो करवटें बदलता है तो दूध हिल-हिल कर दहीं बन जाता है, फिर दहीं से मक्खन निकल आता है, मक्खन फैट में बदल जाता है और उस फैट से चीनी बन जाती है और फिर चीनी की शराब। जिससे नतीजा यह होता है कि जब वो सुबह सोकर उठता है तो वो शराब के नशे में होता है। जिस कारण वो थका-थका और सुस्त महसूस करता है।

एक दरवाजे पर एक घंटी लगी हुई थी, जिस पर लिखा था, ‘डॉक्टर के लिए घंटी बजाइए।’

आधी रात को संता शराब में टुन्न उधर से निकला, उसने घंटी देखी, फिर ऊपर लिखी लाइन पढ़ी और फिर घंटी बजाने लगा।

थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और आँखें मलता हुआ एक आदमी बाहर निकला।

संता ने पूछा,”आप डॉक्टर हैं?”

डॉक्टर: हाँ।

संता: यह घंटी आप खुद नहीं बजा सकते?

एक बार संता अपने ससुराल मिलने के लिए गया और ज़मीन पर बैठ गया।

सास: बेटा ज़मीन पर क्यों बैठे हो? ऊपर सोफे पर बैठ जाओ।

संता: नहीं मैं यहीं ठीक हूँ।

सास: इतना अच्छा सोफा है फिर भी नीचे क्यों बैठे हो?

संता: सोफे पर तो गरीब लोग बैठते हैं। मैं नीचे ज़मीन पर ही ठीक हूँ।

सास(हैरानी से): गरीब लोग, वो कैसे?

संता: सोफे की कीमत पच्चीस हज़ार रुपये और ज़मीन के प्लाट की कीमत पच्चीस लाख रुपये!

एक बार संता काम के लिए विदेश चला गया और वहाँ एक रेस्टोरेंट में काम करने लग गया। वहाँ उसे काम करते कुछ दिन हुए थे कि एक रोज मैनेजर ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया और बताया कि पंजाब से उसके भाई का फ़ोन आया है।

संता खुश हो गया और फ़ोन पकड़ कर काफी देर टूटी-फूटी अंग्रेजी में अपने भाई से बात करता रहा।

आखिरकार बात खत्म करने के बाद जब उसने फ़ोन रखा तो मैनेजर ने उससे पूछा, “अपने भाई से अंग्रेजी में क्यों बात कर रहे थे? अपनी जुबान में बात क्यों नहीं की?”

संता बहुत ही हैरान होकर बोला, “साहब जी, अब मुझे क्या मालूम था कि आपका टेलीफोन पंजाबी भी बोलता है।”

एक बार संता, उसका एक जापानी और एक ब्रिटिश मित्र समंदर घूमने निकले लेकिन अचानक एक तूफ़ान की वजह से वे एक सुनसान टापू पर पहुँच जाते हैं। चलते-चलते उन्हें एक चिराग मिलता है। जापानी चिराग को घिसता है तो उसमें से एक जिन्न बाहर आता है। जिन्न कहता है कि मैं आप तीनों की एक-एक इच्छा पूरी करूँगा।

जापानी कहता है कि मैं अपने घर वापस जाना चाहता हूँ। जिन्न हाथ घुमाता है और वो घर पहुँच जाता है।

ब्रिटिश भी अपने घर जाने की इच्छा रखता है और वो भी घर पहुँच जाता है।

संता सोच में पड़ जाता है और अपनी इच्छा बताते हुए कहता है, “भई, उन दोनों के जाने से मैं तो अकेला पड़ गया, तुम ऐसा करो उन दोनों को वापस बुला लो।”

संता: मैं दुनियां के सारे अस्पतालों में हो कर आ चूका हूँ।

बंता: नहीं, तुम अभी तक एक अस्पताल में हो कर नहीं आए होगे।

संता: हो ही नहीं सकता, तुम उस अस्पताल का नाम बताओ।

बंता: जनाना अस्पताल।

संता: अरे यार, वहाँ तो मैं पैदा ही हुआ था।

एक बार किसी जगह संगीत की महफ़िल चल रही थी। एक गायक ने जैसे ही गाना गाया, सब बोले, “वन्स मोर (Once more)।”

गायक ने गाना फिर सुना दिया।

दूसरी बार भी गाना खत्म हुआ तो सब लोग फिर से बोल उठे, “वन्स मोर (Once more)”।

इस बार गायक ने कहा, “मेरे प्यारे सुनने वालो, मैं आपका मेरे लिए प्यार समझता हूँ। पर मेरी भी कुछ मर्यादा है। मैं इतनी बार नहीं गा सकता।”

तभी महफ़िल में से एक आदमी उठ कर बोला, “जब तक तुम ठीक से नहीं गाओगे, तुमको गाना ही पड़ेगा।”

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