एक बार संता गाड़ी में अपने दोस्त बंता के साथ पिकनिक पर जा रहा था। गाड़ी के सामने के काँच से बंता को कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन संता सड़क के तमाम गड्ढे बचाता हुआ बड़ी सफाई से गाडी चला रहा था।

बंता ने हैरान होकर पूछा, “संता, सामने काँच से कुछ भी साफ़ नजर नहीं आ रहा। फिर भी गाड़ी इतनी परफेक्ट कैसे चला रहे हो?”

संता: क्या बताऊँ यार? अपनी भूलने की आदत के कारण अब तक मेरे 180 चश्मे गुम चुके हैं।

बंता: अरे संता मैं ड्राइविंग के बारे में पूछ रहा हूँ।

संता: वही तो बता रहा हूँ कि चश्मे बनवा बनवा कर मैं परेशान हो गया तब मैंने गाड़ी का काँच ही चश्मे के नंबर वाला बनवाकर गाड़ी में लगवा लिया।

आज तो कमाल ही हो गयी। सुबह-सुबह श्रीमती जी नाश्ता बना रही थी, इतने में किसी ने दरवाजा खटखटाया। श्रीमती जी ने दरवाज़ा खोला तो एक सेल्समैन दनदना के अंदर पहुँचा और पूरे कालीन पर गोबर गिरा दिया।

श्रीमती जी गुस्से में चिल्लाते हुए, “अरे, यह क्या कर दिया। अभी तो सफाई की है और आप हो कौन?”

सेल्समैन: मैडम मैं एक सेल्समैन हूँ, आपको यह वैक्यूम क्लीनर का कमाल दिखाने आया हूँ।

श्रीमती जी: वैक्यूम क्लीनर का कमाल दिखाना है तो यह सारी गंदगी क्यों फैला दी?

सेल्समैन: मैडम तभी तो इसका कमाल दिखेगा।

सेल्समैन: क्योंकि अभी 2 मिनट में देखना यह सारी गंदगी साफ़ हो जाएगी और अगर ऐसा नहीं हुआ तो मैं खुद अपनी जीभ से चाट कर इसे साफ़ करूँगा।

श्रीमती जी ने सेल्समैन की तरफ घूर कर देखा और बोली, “जीभ से मत चाटना ऐसे ही हाथ से उठा कर खाना शुरू कर दो।”

सेल्समैन: आप ऐसा क्यों बोल रही हैं मैडम।

श्रीमती जी: क्योंकि घर में बिजली नहीं है। अब हो जाओ शुरू।

शिक्षा: कुछ भी करने से पहले पूरी जानकारी इकठी कर ले ताकि बाद में पछताना ना पड़े।

एक बार संता और बंता एक कोयले की खदान में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो मैनेजर पहले बंता को बुलाता है और उसका इंटरव्यू लेता है।

मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले भी कभी खदान में काम किया है?

बंता: जी हाँ।

मैनेजर: अच्छा तो मुझे यह बताओ की उसकी गहराई कितनी थी?

बंता: जी 20 फुट।

बंता की बात सुन मैनेजर को गुस्सा आ जाता है तो वह उस से कहता है, “क्या बकवास कर रहे हो 20 फुट गहरी भी कोई खदान होती है, तुम झूठ बोल रहे हो इसीलिए मेरे कमरे से बहार निकल जाओ।”

मैनेजर की बात सुन बंता बहार आ जाता है और संता को अन्दर हुई सारी बात बताता है और कहता है, “अगर मैनेजर अन्दर तुमसे खदान की गहराई के बारे में पूछे तो ज्यादा से ज्यादा बताना।”

उसके बाद संता की बारी आती है तो मैनेजर फिर उस से वही सवाल पूछता है।

मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले कभी खदान में काम किया है?

संता: जी हाँ।

मैनेजर: अच्छा तो उस खदान की गहराई कितनी थी?

संता: जी 20,000 हज़ार फुट।

मैनेजर: बहुत बढ़िया तो एक बात और बताओ कि इतनी गहराई में काम करते वक्त तुम किस तरह की लाईटों का प्रयोग करते थे?

संता: जी मुझे कभी लाईटों की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी दिन की शिफ्ट होती थी।

एक बार संता को एक लड़की से प्यार हो गया। वो रोज़ उसे ऑफिस, जहाँ को काम करती, ले जाने और वापस घर छोड़ के आने लगा।

एक दिन रास्ते में लड़की बेहद उदास हो कर बोली, “कल लड़के वाले मुझे देखने आये थे।”

संता: फिर?

लड़की: मुझे पसंद कर गए।

संता बेहद दुखी होते हुए बोला, “अब?”

लड़की रोन लगी और रोते – रोते बोली, “अगले महीने की शादी तय हो गई, उनका घर लक्ष्मी नगर है।”

संता गहरी सोच में पड़ गया।

लड़की: अब क्या करना है, सोचो जल्दी।

संता: सोच ही तो रहा हूँ। अब लक्ष्मी नगर से तुम्हें ऑफिस छोड़ने के लिए मुझे रिंग रोड़ लेनी पड़ेगी, फिर 3 किलोमीटर बाद यू – टर्न, उसके बाद वन वे के कारण राजगुरु रोड़, फिर वो मुखर्जी नगर वाला फ्लाई ओवर… ओये नहीं मेरे बस की बात नहीं है, तू अपने पति को ही बोल कोई इन्तेजाम करे, मुझे बहुत लम्बा पड़ेगा।”

एक बार संता और बंता दोनों एक दुकान पर गए। वहाँ सब लोगों को अपने काम में व्यस्त देख कर बंता ने 3 चॉकलेट चुरा लिए।

जब दोनों बाहर आये तो बंता अपनी ढींगे हांकने लगा कि वो बहुत चालाक है। उसने 3 चॉक्लेट चुराए और किसी को पता भी नहीं लगने दिया। तुम ऐसा नहीं कर सकते।

यह सुनकर संता को भी गुस्सा आ गया और बोला, “चलो मैं तुम्हें इससे भी बढ़िया चीज़ दिखाता हूँ।”

वो दोनों वापिस अंदर चले गए। अंदर जाकर संता ने दुकानदार से कहा, “क्या तुम जादू देखना चाहते हो?”

दुकानदार ने कहा, “हाँ, ठीक है।”

संता: तो फिर मुझे एक चॉकलेट दो।

दुकानदार ने संता को चॉकलेट दी और संता ने वो चॉकलेट खा ली और दूसरी चॉकलेट मांगी। दुकानदार ने दूसरी चॉकलेट भी दे दी तो संता ने उसे भी खा लिया। अब संता ने दुकानदार से तीसरी चॉकलेट मांगी और वो भी खा ली।

दुकानदार ने पूछा, “इसमें जादू कहाँ है?”

संता: मेरे दोस्त की जेब देखो तो तुम्हें तुम्हारी तीनों चॉकलेट वापिस मिल जाएँगी!

एक बार संता और बंता एक कोयले की खदान में नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाते हैं तो मैनेजर पहले बंता को बुलाता है और उसका इंटरव्यू लेता है।

मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले भी कभी खदान में काम किया है?

बंता: जी हाँ।

मैनेजर: अच्छा तो मुझे यह बताओ की उसकी गहराई कितनी थी?

बंता: जी 20 फुट।

बंता की बात सुन मैनेजर को गुस्सा आ जाता है तो वह उस से कहता है, “क्या बकवास कर रहे हो 20 फुट गहरी भी कोई खदान होती है, तुम झूठ बोल रहे हो इसीलिए मेरे कमरे से बहार निकल जाओ।”

मैनेजर की बात सुन बंता बहार आ जाता है और संता को अन्दर हुई सारी बात बताता है और कहता है, “अगर मैनेजर अन्दर तुमसे खदान की गहराई के बारे में पूछे तो ज्यादा से ज्यादा बताना।”

उसके बाद संता की बारी आती है तो मैनेजर फिर उस से वही सवाल पूछता है।

मैनेजर: क्या तुमने इस से पहले कभी खदान में काम किया है?

संता: जी हाँ।

मैनेजर: अच्छा तो उस खदान की गहराई कितनी थी?

संता: जी 20,000 हज़ार फुट।

मैनेजर: बहुत बढ़िया तो एक बात और बताओ कि इतनी गहराई में काम करते वक्त तुम किस तरह की लाईटों का प्रयोग करते थे?

संता: जी मुझे कभी लाईटों की ज़रूरत नहीं पड़ी क्योंकि मेरी दिन की शिफ्ट होती थी।

अध्यापिका पप्पू से: तुम इतने परेशान क्यों हो?

पप्पू ने कोई जवाब नहीं दिया।

अध्यापिका: क्या हुआ, क्या तुम अपना पेन भूल आये हो?

पप्पू फिर चुप।

अध्यापिका ने फिर से सवाल किया: रोल नंबर भूल गए हो?

पप्पू इस बार भी चुप।

अध्यापिका फिर से: हुआ क्या है, कुछ तो बताओ क्या भूल गए?

पप्पू गुस्से से: ओये! चुप कर मेरी माँ, यहाँ मैं पर्ची गलत ले आया हूँ और तुझे पेन-पेंसिल और रोल नंबर की पड़ी हुई है।

जब भगवान सारी सब्जियों को उनके गुण और सुगंध बांट रहे थे तब प्याज चुपचाप उदास होकर पीछे खड़ी हो गई। सब चले गए प्याज नहीं गई। वहीँ खड़ी रही। तब विष्णुजी ने पूछा, “क्या हुआ तुम क्यों नही जाती?”

तब प्याज रोते हुए बोली, “आपने सबको सुगंध और सुंदरता जैसे गुण दिए पर मुझे बदबू दी। जो मुझे खाएगा उसका मुँह बदबू देगा। मेरे साथ ही यह व्यवहार क्यों?”

तब भगवान को प्याज पर दया आ गई। उन्होने कहा, “मैं तुम्हे अपने शुभ चिन्ह देता हूँ। यदि तुम्हें खड़ा काटा जायेगा तो तुम्हारा रूप शंखाकार होगा और यदि आड़ा काटा गया तो चक्र का रूप होगा। यही नहीं सारी सब्जियों को तुम्हारा साथ लेना होगा, तभी वे स्वादिष्ट लगेंगी और अंत में तुम्हे काटने पर लोगों के वैसे ही आंसू निकलेंगे जैसे आज तुम्हारे निकले हैं। जब जब धरती पर मंहगाई बढ़ेगी तुम सबको रुलाओगी।

दोस्तों इसीलिए प्याज आज इतना रुला रही है उसे वरदान जो प्राप्त है।

परम ज्ञानी गुरु बाबा बकवास नंद के प्रवचनों से साभार!

कृपया इसे ध्यान से पढ़ें:

कामवाली को तनख्वाह दे दी है ज्यादा दानवीर मत बनना।

आपको कितनी बार बताया है कि पडोसन का अख़बार वाला, दूध वाला और लॉन्ड्री वाला हमसे अलग है। हर रोज़ सुबह पूछने मत पहुँच जाना कि अख़बार आया कि नही।

अलमारी में बायीं तरफ पर आपकी बनियान-चड्डी रखी है, दायीं तरफ पर मुन्ने की हैं, पिछली बार की तरह उसकी मत पहन लेना नहीं तो फिर सारा दिन ऑफिस में ऊपर नीचे खींचते रहोगे।

चश्मा सही जगह पर रखना, पिछली बार मैं 5 दिन बाद आई थी तो फ्रिज के अंदर से मिले थे।

अपना मोबाइल भी संभाल कर रखना। पिछली बार बाथरूम में साबुन की जगह मिला था। मुझे तो आज तक यह पता नही चल सका कि बाथरूम में मोबाइल का क्या काम होता है।

और हाँ, अपने सगे-संबंधियों और यार-दोस्तों को ज्यादा जमा मत करना, पिछ्ली बार सोफे के कवर से कितने सारे मूंगफली के छिलके निकले थे।

और ज्यादा उछलने की ज़रुरत नही है, मैं कभी भी अचानक आ सकती हूँ, खयाल रखना।

एक बार दो दोस्त गोरखपुर से दिल्ली जा रहे थे।

डिब्बे में भीड़ ज्यादा थी तो उन्हें सीट नहीं मिल रही थी तो सीट के लिए उन्हें शरारत सूझी।

उन्होंने अपने बैग से रबड़ का एक सांप निकाला और चुपके से डिब्बे में छोड़ दिया और चिल्लाने लगे।
सांप… सांप!

थोड़ी देर में डिब्बा खाली हो गया और उन्होंने जल्दी से बिस्तर जमाकर जगह रोक ली।

सुबह जब आंख खुली, तो पांच बजे थे और गाड़ी किसी स्टेशन पर खड़ी थी।

उन्होंने खिड़की से बाहर झांककर रेलवे के कर्मचारी से पूछा: यह कौन सा स्टेशन है?

जवाब मिला: गोरखपुर।

उन्होंने पूछा: क्या गाड़ी दिल्ली नहीं गई?

कर्मचारी बोला: गाड़ी तो दिल्ली गई, लेकिन इस डिब्बे में सांप निकलने के कारण इस डिब्बे को काट दिया गया।

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